Thursday, 21 May 2020

भाभी को chudai के लिए तैयार किया भाभी की मस्त चू त

पड़ोस की एक सेक्सी भाभी से एक धार्मिक आयोजन में मेरी पहली बार बात हुई. उससे दोस्ती के बाद मैंने प्रपोज किया तो वो भड़क गयी. फिर मैंने भाभी को चुदाई के लिए कैसे पटाया?
दोस्तो, मेरा नाम rahul
है और मैं अहमदाबाद के पास के एरिया से हूं. यहां पर गोपनीयता की वजह से अपना निवास स्थान नहीं बता सकता हूं. मेरी उम्र 28 साल है और औसत दिखने वाला व्यक्ति हूं. मगर मेरी बॉडी जिम टाइप है.
मैं नियमित रूप से इंटरनेट पर सेक्स कहानियां पढ़ता रहता हूं. मुझे लगा कि एक बार मैं भी अपनी स्टोरी आप लोगों के साथ शेयर करूं. इसलिए मैं इस भाभी सेक्स कहानी को लिख रहा हूं.
सेक्सी भाभी और प्यासी आंटियों के साथ मेरे बहुत बार शारीरिक संबंध बने हैं. मैंने कभी किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की वरन् उनकी इच्छा से ही मैंने सेक्स संबंध बनाये. जब सामने वाली की मर्जी होती थी तभी मैं उसके साथ सेक्स करता था.
यह कहानी जो मैं आप लोगों को बता रहा हूं, मेरे फ्लैट में रहने वाली एक भाभी की है. उस वक्त अहमदाबाद में नवरात्र का उत्सव चल रहा था. वहीं से भाभी के साथ मेरी कहानी की शुरूआत हो गयी.
कहानी को आगे बताने से पहले मैं उस भाभी का परिचय आपको दे देता हूं. उसका नाम प्रतीक्षा (बदला हुआ) था. अगर मैं उसको एक हॉट माल या सेक्स बॉम्ब कहूं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.
गुजराती भाभी के फिगर के बारे में तो आप अंदाजा लगा ही सकते हैं. प्रतीक्षा का फिगर भी ऐसा ही पटाखा था. उसकी उम्र 37 साल के करीब थी. 2 बच्चों की मां बन चुकी थी. मगर फिर भी उसके फिगर को देख कर कोई कह नहीं सकता था कि ये शादीशुदा चुदी हुई औरत दो बच्चों की माँ भी हो सकती है. उसने अपने फीगर को अच्छा खासा मेंटेन करके रखा हुआ था.
उस सेक्सी भाभी का साइज 32-30-36 था. बहुत ही गुदाज और भरा हुआ सा बदन था उसका. उसकी फैमिली में उसके पति और उसके दो बच्चे थे. भाभी का घर पास में होते हुए भी हमारी कभी बात नहीं हो पाई थी. मगर जब भी कभी वो सामने आ जाती थी तो लंड अंगड़ाई लेकर पलट जाता था. उसको देखते ही दिमाग भटक जाता था.
न जाने कितनी ही बार प्रतीक्षा भाभी के बारे में सोच कर मैं अपनी तन्हा रातों का अकेलापन अपने लंड को रगड़ कर पूरा करता था. जब तक उसके नाम की मुठ न मार लूं मुझे चैन की नींद नहीं आती थी. उस वक्त उसके मुंह में लंड देकर चुसवाना जैसे एक सपने जैसा लगता था. मुझे उम्मीद नहीं थी कि एक दिन ये सपना हकीकत भी बन सकता है.
प्रतीक्षा ये भी जानती थी कि मैं उस पर लाइन मार रहा हूं. मगर कभी भी उसने ये जाहिर नहीं होने दिया कि वो मेरी हरकतों को समझ भी रही है. पहली बार नवरात्र में हम दोनों के बीच में थोड़ी बहुत बात हुई.
मैंने अपना नम्बर उसको दिया कि कभी कुछ हेल्प चाहिए तो मुझे कॉल कर ले. कई दिनों तक मैं इंतजार करता रहा कि सेक्सी भाभी का फोन नम्बर कभी तो मेरी इनकमिंग कॉल में दिखेगा. मगर 10-12 दिन का इंतजार करने के बाद भी भाभी का कॉल नहीं आया.
एक दिन जब मैं अपने ऑफिस में था तो उसका मैसेज मुझे रिसीव हुआ. उसने हैलो लिखा हुआ था. मैं खुश हो गया और उसको थैंक्स बोला और बातें करने लगे हम. कई दिनों तक उससे बात होती रही.
फिर एक दिन उसने मुझे अपनी फोटो भेजी. उसमें उसने ब्लैक रंग की साड़ी पहनी हुई थी. उसकी फोटो पर मैंने उसको रिप्लाई दिया कि आप बहुत ही हॉट और सेक्सी लग रही हो. उसने मुझे थैंक्स बोला और स्माइल का इमोजी भेज दिया. मैं खुश था कि उसने मेरी बात का बुरा नहीं माना.
उस दिन के बाद से हम दोनों थोड़ा खुल कर बातें करने लगे. हम दोनों में अब नजदीकी बढ़ रही थी. एक बार ऐसे ही बात बात में मैंने उसको आई लव यू भी बोल दिया. इस बात पर वो मेरे ऊपर गुस्सा हो गयी. उसने मेरा नम्बर ही ब्लॉक कर दिया.
मुझे अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ. बहुत ही मुश्किल से भाभी को पटाने की कोशिश थोड़ी कामयाब हुई थी मगर मैंने खुद ही अपनी उस मेहनत पर पानी फेर दिया.
कुछ दिन ऐसे गुजर गये. फिर 5-7 दिन के बाद उसने फोन किया और बोली- तू मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकता है? मैं एक शादीशुदा औरत हूं और मेरा एक परिवार भी है. मैं अपने पति के साथ पूरी वफादारी के साथ अपना शादी का बंधन निभा रही हूं. मैं उनको धोखा नहीं दे सकती.
बात को बिगड़ता हुआ देख मैंने उससे माफी मांगी और उसको किसी तरह से सॉरी बोल बोल कर शांत किया.
मैंने कहा- भाभी मेरे दिल में आपके लिए बहुत इज्जत है, मगर मैं अब आपसे प्यार भी करने लगा हूं. ये सब कब हुआ मुझे पता भी नहीं चला. मेरी बात पर यकीन करिये. मुझे खुद समझ नहीं आ रहा कि मैं अब क्या करूं. आप बहुत अच्छी लगती हो मुझे.
अपने हुस्न की तारीफ सुन कर उसको थोड़ा अच्छा लगा और वो खुश हो गयी.
वो बोली- ठीक है, मैं इसके बारे में सोच कर ही जवाब दूंगी.
उसके बाद तीन-चार दिन तक हमारी हल्की फुल्की नॉर्मल सी बात हुई.
कुछ दिन इंतजार करवाने के बाद उसने मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर लिया. मैं मन ही मन नाचने लगा. मन में लड्डू फूट रहे थे कि सेक्सी भाभी की चूत चुदाई का जुगाड़ हो गया.
एक दिन मैंने भाभी को मिलने के लिए पूछा. वो बोली कि शाम को बताऊंगी. फिर देर शाम को भाभी का फोन आया और कहने लगी कि कल दोपहर को आ जाना. उस वक्त उसके बच्चे ट्यूशन पर होते हैं और मैं घर पर अकेली ही रहती हूं.
पहले तो मैं बहुत खुश हो गया. मगर मैं थोड़ा डर भी रहा था क्योंकि उसका घर पड़ोस में ही था और मुझे ये सोच कर डर लग रहा था कि अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा. फिर मैं अगले दिन थोड़ी हिम्मत करके उसके घर गया.
भाभी को मैंने पहले ही बोल दिया था कि मेरे आने के समय पर वह अपने घर का दरवाजा पहले से ही खोल कर रखे. जब मैं उसके घर पहुंचा तो घर का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था. मैं सीधा अंदर चला गया. वो दरवाजे के पास ही खड़ी हुई थी और मेरे अंदर आते ही उसने घर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.
उस वक्त भाभी ने एक ब्लैक रंग की ड्रेस पहनी हुई थी. उसमें वो कयामत लग रही थी. उसको देख कर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. फिर हम लोग अंदर हॉल में जाकर बैठ गये. हम दोनों ने थोड़ी नॉर्मल सी बातें की.
धीरे धीरे मैंने भाभी के हाथ पर हाथ रख लिया था और मैं उसके हाथ को हल्के हल्के सहला रहा था. भाभी मुस्करा रही थी. मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपनी जांघ पर रखवा लिया. अब मैं उसके हाथ को अपनी जांघ पर दबाते हुए सहला रहा था.
फिर मैंने उसके फेस को अपनी ओर किया और उसके माथे पर चूम लिया. फिर मैंने उसके गाल पर किस किया. अब वो थोड़ी सीरियस होने लगी थी. उसके चेहरे पर एक कशिश आ गयी थी.
मैंने उसके होंठों पर उंगली फिराई और कहा- मुझे इनका रस पीना है.
मेरे इतना कहने पर वो मेरे होंठों के पास में अपने होंठों को ले आई और उसने अपने लबों को मेरे लबों पर सटाते हुए मेरे सिर को पकड़ कर मुझे चूसने लगी.
हम दोनों एक दूसरे के होंठों का रस पीने लगे. मैं उसके मुंह में अपनी जीभ को अंदर तक घुसाने लगा और भाभी मेरी जीभ को अपने मुंह में अंदर खींचने लगी. उसके मुंह की लार पीते हुए मेरे अंदर की हवस और भी तेजी से भड़क रही थी.
अब मेरे हाथ उसके बदन को नाप रहे थे. मेरे हाथ उसकी कमर, उसकी पीठ को सहलाते हुए उसके बूब्स को छेड़ते हुए उसकी गर्दन तक घूम रहे थे. वो भी मेरी पीठ को सहला रही थी. उसके कोमल हाथों को स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था मुझे. करीबन 10-15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को ऐसे ही चूसते और पीते रहे.
उसके बाद मैं उठ खड़ा हुआ. मेरा लंड तंबू बना चुका था. बार बार मेरी पैंट में उछल उछल कर कूद रहा था. भाभी मेरे तने हुए लंड को घूरते हुए एक कातिल मुस्कान के साथ मेरी ओर देख रही थी.
मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको अपनी ओर खींचते हुए ऊपर उठाया और फिर उसको गोदी में उठा कर अंदर बेडरूम की ओर लेकर चला. अंदर ले जाकर मैंने उसको बेड पर पटक दिया. फिर मैं भी साइड से घूम कर बेड पर चढ़ गया और उसकी बगल में लेट कर अपनी एक टांग उसकी जांघों पर चढ़ा कर उससे लिपट गया. मेरा लंड उसकी चूत वाले हिस्से पर टकरा रहा था.
उसने भी मुझे अपनी बांहों में समेट लिया और हम दोनों एक बार फिर से एक दूसरे को किस करने लगे. अब दोनों का ही जोश बढ़ गया था. मेरे हाथ उसके बूब्स पर जाकर उसके मोटे मोटे चूचों को दबाने लगे.
भाभी भी गर्म हो चुकी थी और उसका हाथ मेरे लंड पर आकर टिक गया था. वो धीरे धीरे मेरे लंड को पकड़ने की कोशिश करते हुए मेरे लंड की शाफ्ट को रगड़ रही थी. कभी मेरे लंड को दबा कर देखती थी और कभी उसको अपने हाथ से नापने की कोशिश करती.
मेरा लंड बिल्कुल रॉड की तरह सख्त होकर फुल जोश में आ चुका था. मैं भी उसकी हर हरकत पर ध्यान देकर ये देख रहा था कि उसकी इच्छा क्या क्या है और उसको एक मर्द के साथ क्या क्या करना अच्छा लगता है.
प्रतीक्षा पूरी गर्म हो चुकी थी और मुझसे एकदम चिपकते हुए लिपटने की कोशिश कर रही थी. मैं उसकी कमर पर सहलाते हुए उसको और ज्यादा गर्म कर रहा था. मेरे कठोर हाथों का स्पर्श उसके कोमल से बदन में सिहरन पैदा कर रहा था. वो मछली के जैसे छटपटा सी रही थी.
जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो उसने मुझे बेड पर अपने नीचे पटक लिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी. वो एकदम पागलों की तरह मुझे चूमने लगी. कभी मेरी गर्दन पर तो कभी मेरे लिप्स पर, कभी मेरे गालों पर तो कभी मेरे कानों के नीचे वाले हिस्से को दांत से खींच रही थी.
उसके इन बेतहाशा चुम्बनों से मेरा जोश और बढ़ गया, मेरा लंड मेरी पैंट में फंसा हुआ दर्द करने लगा था. अब मेरा लंड मेरी पैंट से बाहर आने के लिए तड़प रहा था. मैं बार बार अपने लंड को अपनी पैंट में एडजस्ट कर रहा था.
भाभी ने अब मेरे कपड़े उतारने शुरू किये. पहले उसने मेरी टीशर्ट निकाल दी और मेरी चेस्ट पर अपने होंठों से चूमने लगी. कभी मेरी छाती पर अपने दांत से रगड़ रही थी. दांतों के काटने से मेरी चेस्ट पर लव बाइट के निशान पड़ने लगे.
अब मैं भी अपना कंट्रोल खो रहा था. मैंने उसको पकड़ा और उसके हाथ ऊपर करके उसके ड्रेस को ऊपर कर दिया. उसकी ड्रेस निकाल कर एक तरफ डाली और उसके बदन पर केवल एक ब्रा और पैंटी रह गयी. उसने एक नीले रंग की पैड वाली ब्रा पहनी हुई थी.
उस नीले रंग की ब्रा में भाभी बहुत ही कमाल की सेक्सी माल लग रही थी. उसके गोरे बदन पर उस नीली ब्रा में कैद उसकी गोरी गोरी मोटी चूचियां देख कर मेरे मुंह में पानी आने लगा. मन करने लगा कि उसकी चूचियों को काट काट कर खा ही लूं. उसकी पैन्टी को उतार कर उसकी चूत को चूस लूं.
मुझसे अब एक पल का भी इंतजार नहीं हो रहा था. मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबोच दिया और धीरे धीरे से उनको दबाने लगा. मैं दोनों हाथों से उसके बूब्स को भींच भींच कर मजा लेने लगा. वो भी गर्म गर्म कामुक आहें भरने लगी.
सेक्सी भाभी काफी मूड में आ गयी थी अब. फिर उसने अपनी ब्रा को खुद ही उतार कर एक तरफ डाल दिया और उसके दूध जैसे सफेद वक्ष आजाद हो गये जिनके बीच में उसके भूरे रंग के तने हुए कड़क से निप्पल नुकीले होकर बाहर की ओर इशारा कर रहे थे.
बिना देर लगाये मैंने उसके चूचों को चूसना शुरू कर दिया. बारी बारी से मैं उसके दूधों को पीने लगा. उसके चूचों को जोर से दबाते हुए मैं मुंह उसके निप्पलों पर दबाए हुए उसके दूध को जैसे निचोड़ने की कोशिश करने लगा. उसके मुंह से अब तेज तेज सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … अच्छा लग रहा है… ओह्ह … और पीयो … निचोड़ लो इनको … आह्ह जोर से …आह्ह… चूसो।
मैं बीच बीच में उसके निप्पल्स को अपने दांतों से काट भी रहा था जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क जाती थी. काफी देर तक मैं उसके बूब्स को चूसता रहा और वो गर्म होती चली गयी. अब उससे भी शायद रुकना मुश्किल हो रहा था और उस सेक्सी भाभी की चूत चुदने के लिए काफी उतावली हो गयी थी.
इसलिए प्रतीक्षा ने अब और प्रतीक्षा न करते हुए मेरी पैंट के बटन पर हाथ मारा और उसको पकड़ कर खींचते हुए खोल दिया. उसने मेरी पैंट को खींच कर नीचे कर दिया. अब मेरी जांघों पर मेरे अंडरवियर के सिवाय पूरे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था.
मेरा लौड़ा मेरे अंडरवियर को गीला कर चुका था. लंड का रस मेरे अंडरवियर के बीच में एक बड़ा सा धब्बा बना चुका था. उसने मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया और अपने हाथ से मेरे लंड को दबाने लगी.
उस समय मेरा लंड इतना टाइट हो चुका था कि झटके पर झटके मार रहा था और किसी भी तरह के छेद में घुसने के लिए तड़प गया था. भाभी ने मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर ही नाप कर देखा और बोली- तुम्हारा लंड तो काफी बड़ा लग रहा है. मैंने कभी असल जिन्दगी में इतना दमदार और तगड़ा लंड हाथ में लेकर नहीं पकड़ा है.
वो लंड देखने के लिए लालायित हो रही थी इसलिए मैंने भी उसकी इच्छा को पूरी करने के लिए अपना अंडरवियर उतार दिया और उसको अपने लंड के दर्शन करवाये.
लंड को देख कर उसके चेहरे पर एक खुशी सी छा गयी. अपने उत्साह को छुपा नहीं पा रही थी. फिर उसने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर उसकी गर्मी महसूस की और उससे खेलने लगी. वो शायद इंतजार नहीं कर पा रही थी. वो मेरे लंड को ऊपर नीचे करते हुए उसकी मुठ मारने लगी. उसकी ताकत का अंदाजा लगाने लगी.
मेरे लंड से कामरस की बूंदें बार बार बाहर निकल कर लंड को और ज्यादा चिकना बना रही थीं. ऐसा लग रहा था कि जल्दी ही वीर्य भी निकल जायेगा. मैं उसके कोमल हाथों के स्पर्श का मजा अपने लंड पर ले रहा था और खुद को संयम में रखने की कोशिश कर रहा था.
अब मेरा मन कर रहा था कि अपना लंड उसके मुंह में दे दूं.
मैंने कहा- प्रतीक्षा, एक बार इसको मुंह में लेकर चूसो ना, बहुत मन कर रहा है.
वो बोली- नहीं, मैं ये नहीं कर पाऊंगी. मैं लंड को मुंह में नहीं लेती हूं.
मैंने कहा- एक बार मेरे कहने पर ले लो ना प्लीज।
मगर उसने फिर भी मना कर दिया.
वो बोली- मुझे ये गंदा लगता है. मैंने कभी आज तक मुंह में लंड लिया ही नहीं है.
मेरे कई बार कहने पर भी उसने लंड को मुंह में लेने के लिए हामी नहीं भरी.
अब मैंने भी उसको फोर्स करने की नहीं सोची क्योंकि उसके साथ मेरा ये पहला सेक्स होने वाला था. अगर मैं उस वक्त उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती करता तो शायद फिर अगली बार हो सकता था कि अपनी चूत भी न देती. मैंने उसको अपने तरीके से राजी करने की सोची.

Wednesday, 20 May 2020

दिल्ली वाली भाभी की गद्दार चू त की chudai

मैं एक फैक्ट्री में काम से जाता हूँ. उसी फैक्ट्री में जॉब कर रही एक भाभी से बात हुई, काम के कारण मैंने उनका नम्बर लिया. आगे चल कर यह मुलाक़ात बिस्तर तक पहुंची. कैसे?
आप सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार, अश्वनी ,
अम्बाला का रहने वाला हूँ और अन्तर्वासना का काफ़ी पुराना पाठक हूँ. मेरी उम्र 28 साल है. मैं हेल्थी हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच है और लंड का साइज़ 6 इंच है. ये चुदाई स्टोरी अभी हाल ही की है, जो मेरे साथ घटी.
मैं अपने काम की वजह से अक्सर दिल्ली एक फैक्ट्री में जाता रहता हूँ. मेरा होलसेल का काम है. इसी दौरान मेरी मुलाक़ात एक भाभी से हुई, जो दिल्ली की उसी फैक्ट्री में जॉब करती थीं जहां मुझे माल खरीदने जाना होता था.
भाभी का नाम रेखा था. उनकी उम्र 30 साल करीब थी और वो काफी सुन्दर थीं. उनका साइज़ 32-28-34 का था. भाभी एक छरहरे बदन की मल्लिका थीं. मैं उनको देखने का एक भी मौका नहीं छोड़ता था. शायद भाभी ने मेरी इस नजर को भांप लिया था, मगर उन्होंने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा.
जब भी मैं वहां जाता था, तो उनसे मेरी काफी बातचीत होती रहती थी. मेरे सामान का जितना भी ऑर्डर होता था, सब रेखा भाभी ही रेडी कराती थीं.
जब मैं जून में दिल्ली गया, तो भाभी से मिला. इस बार आर्डर ज्यादा था, तो माल जल्दी पैक नहीं हो पा रहा था. इस वजह से मैंने रेखा भाभी का नम्बर ले लिया ताकि मुझे अपना सामान जल्दी पैक करवाने में उनसे बातचीत में कोई दिक्कत ना हो.
मैं अपने बाकी के काम के लिए दिल्ली की दूसरी जगह चला गया. मेरे आने से पहले ही मुझे मेरा सामान रेडी मिल सके. इसलिए मैंने भाभी से उनका नम्बर ले लिया था. इस नम्बर से मुझे ये सुविधा भी होने वाली थी कि कभी कोई थोड़ा सा माल कम लेना हुआ तो उनको फोन करके बता दिया और मुझे माल की डिलीवरी घर बैठे मिल जाए.
अब रेखा भाभी से मेरी अक्सर फ़ोन पर बात होने लगी. चूंकि व्हाट्सैप का जमाना है सो भाभी से कभी व्हाट्सैप पर बात होने लगी.
एक बार व्हाट्सैप पर बात होना शुरू हुई, तो सुबह शाम की हैलो हाय भी होने लगी. भाभी मुझसे कुछ ज्यादा ही बात करने लगी थीं. मुझे भी भाभी में रस आता था, इसलिए मैं भी रेखा भाभी से लसने लगा. कुछ ही समय में हम दोनों एक दूसरे से काफी खुलने लगे थे.
इसी दरमियान हम दोनों ने एक दूसरे को अपने बारे में काफी कुछ बताना शुरू कर दिया था. रेखा भाभी ने भी मुझे अपनी लाइफ़ के बारे में बताया. भाभी शादीशुदा होने के बावजूद भी अपने पति के ड्रिंक करने की वजह से पांच साल से अलग रहकर दिल्ली में जॉब कर रही थीं.
जब उन्होंने मुझसे अपने पति से अलग रहने की बात कही, तो मुझे उनमें एक प्यासा माल नजर आने लगा. मैंने उनको कुछ इसी तरह की बातों की तरफ मोड़ा, जिससे वो अपने दिल के दर्द को मुझसे शेयर करने लगें.
आग शायद उस तरफ भी लगी हुई थी. इसलिए नतीजा ये हुआ कि भाभी धीरे धीरे मुझसे एकदम खुलकर बात करने लगीं. हम दोनों में एडल्ट जोक्स भी होते रहते थे.
एक दिन जब मैंने उनको बोला- मैं आपको बहुत पसन्द करता हूँ.
उन्होंने भी ‘सेम हियर..’ बोल कर रिप्लाई दे दिया.
मुझे तो मानो अंगूर का चमन नसीब हो गया था. ऐसा ग़दर माल मुझसे पसंदगी जता रहा था, मतलब उसकी चुत में भी लंड की दरकार थी.
मैंने उनसे प्यार मुहब्बत की बातें करनी शुरू कर दीं और भाभी भी मुझसे अपने दिल का हाल सुनाने लगीं. हम दोनों अब वीडियो चैट भी करने लगे थे. रात को देर तक भाभी के साथ बात होने लगी थी. शायद हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे. इस बीच भाभी ने मुझे अपने शरीर के थोड़े बहुत दर्शन भी करा दिए थे.
एक दिन मैंने उनसे मिलने को बोला, तो वो भी सेक्स के लिए तड़प रही थीं. उन्होंने झट से हामी भर दी.
हम दोनों ने एक होटल में मिलने का तय किया. मैंने ऑनलाइन एक होटल में रूम बुक किया और भाभी को बताया कि मैं 25 जुलाई को आ रहा हूँ.
भाभी की दो दिन की ऑफिस से छुट्टी थी. मैंने उस दिन दिन में बारह बजे दिल्ली पहुंच कर उनको कॉल किया.
उन्होंने बोला कि मैं चार बजे तक आऊंगी. उनको अचानक से कोई काम आ गया था. मैंने हामी भरते हुए उनसे इन्तजार करने की बात कही.
भाभी के चार बजे तक आने की जानकर मैंने होटल के कमरे में रेस्ट किया और उनने आने का वेट करने लगा. भाभी के आने का मुझे बड़ी बेसब्री से इन्तजार था मगर टाइम था कि कट ही नहीं रहा था. उनको चोदने के बारे में सोच सोच कर मेरा लंड भी अकड़ गया था और दर्द करने लगा.
जब रेखा भाभी का कॉल आया कि मैं 15 मिनट में आ जाऊंगी. तो मैं एकदम से बेसब्र हो गया और उनके आने का इन्तज़ार करने लगा.
उन्होंने होटल के बाहर आकर मुझे फोन लगाया. मैंने उनको रूम नम्बर 107 में आने को बोला. जब भाभी ने कमरे के बाहर आकर दरवाजे पर दस्तक दी. तो मैंने उन्हें अन्दर आ जाने का कहा.
भाभी कमरे में आईं और डोर लॉक करके पलटीं, तो मैं उनको देखता ही रह गया. वो आज बहुत ही मस्त और हॉट लग रही थीं. उनको देखते ही मैंने अपनी बांहें फैला दीं और भाभी ने अपनी बांहें भी मेरी तरफ खोल दीं. मैंने उनको बांहों में लेकर ज़ोर से अपने सीने से लगा लिया. उन्होंने भी अपनी बांहें फैलाकर मुझे अपनी बांहों में ले लिया.
काफ़ी देर तक हम एक दूसरे को बस फ़ील करते रहे और एक दूसरे को बांहों में भरे आपस में खोये रहे.
फिर धीरे से मैंने भाभी के माथे को चूमा और उनके गालों पर किस किया. भाभी एकदम से सिहर गईं और लजा गईं.
मैंने उनके फूल से नाज़ुक होंठों को किस किया, तो अबकी बार उन्होंने भी इसमें मेरा पूरा साथ दिया. हम दोनों खड़े खड़े ही एक दूसरे को किस करते रहे. कभी उसके ऊपर वाले होंठ को, तो कभी नीचे वाले होंठ को चूमने लगा और भाभी भी मुझे चूमने में सहयोग करती रहीं.
कभी मैं उनके मुँह में अपनी जीभ डाल देता, जिसको वो दोनों होंठों में लेकर किस करने लगतीं और अपने मुँह में और अन्दर तक लेने की कोशिश करतीं.
उनको किस करते हुए ही मैं उनके गले, गालों और उनके कान की लौ को चूमने लगा. साथ ही अपने एक हाथ से उनके दोनों चूचों को दबाने लगा. इससे रेखा भाभी बहुत ज़्यादा गर्म हो गईं और उनके मुँह से ‘आह आह..’ की आवाज़ आने लगी.
मैंने धीरे धीरे उनके कपड़े निकालने शुरू किए. जैसे ही मैं उनके शर्ट को निकाला … एक रेशमी रेड ब्रा में क़ैद उनके दोनों मस्त कबूतर बाहर आने को तड़पते दिखे. मैंने एक पल उनकी रसभरी चूचियों को देखा और एक हाथ से चूचियों को सहलाते हुए धीरे से उनकी ब्रा को निकाल दिया. आह एकदम से दोनों उरोज मानो मेरे हाथों का धन्यवाद कर रहे थे. बाहर की खुली हवा में भाभी के मम्मे फुदकने लगे.
मैंने उनके दोनों चूचों को बारी बारी से जीभ की नोक से चाटा. भाभी की सीत्कार निकल गई और उन्होंने मुझे अपनी चुचियों में खींच लिया. मैंने एक निप्पल को मुँह में लेकर पीने लगा और दूसरे निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच दबाते हुए मसलने लगा.
रेखा भाभी का मस्ती में बुरा हाल होने लगा. वो इस समय ऐसे तड़प रही थीं … जैसे बिन पानी के मछली तड़पती है.
उनके मम्मों को पीते हुए जैसे ही मैंने एक हाथ को उनकी सलवार में डालना चाहा, तो भाभी ने झट से मेरा हाथ रोक लिया. मैंने एक हाथ से उनके एक दूध को पकड़ कर ज़ोर से दबाया, तो उनका हाथ सलवार से हट गया. मैं दूसरे मम्मे को चूसता रहा और पहले हाथ से जल्दी से उनकी सलवार के नाड़े को खींच दिया.
भाभी की सलवार ढीली होते ही जैसे ही नीचे गिरी. मानो पूनम के चाँद की रोशनी फ़ैल गई. एकदम दूधिया और संगमरमर जैसी चिकनी जांघें सामने अपना जलवा बिखेरने लगीं.
मैं हाथ को भाभी की चूत पर लगा दिया. उनकी पैंटी के ऊपर से ही चुत से हाथ टच हुआ, तो पाया कि उनकी चूत तो बहुत ही ज़्यादा गीली और रस से बह रही थी. मैंने भाभी को और तड़पाने के लिए अपनी एक उंगली पैंटी के अन्दर ले जाते हुए उनकी चूत में डाल दी.
जैसे ही मेरी उंगली भाभी की चूत में गई … तो उनके मुँह से एक गर्म आह निकल गई. मुझे उनकी चूत काफ़ी टाइट फ़ील हुई. धीरे धीरे उंगली से ही मैंने भाभी की चुदाई शुरू कर दी. इस वक्त मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था. लंड न जाने कब से अकड़ा पड़ा था, पर मैं रेखा भाभी को ख़ुश करने के चक्कर में सब भूल गया और मेरा उनकी टपकती चूत को चूमने को दिल करने लगा.
मैं उनकी नीचे सरकी हुई सलवार और पेंटी को उनकी टांगों से निकाल दिया और भाभी को एकदम नंगी कर दिया.
मैंने उनको अपने सामने थोड़ा दूर किया और उनकी उफनती जवानी के दरिया को मदहोशी से देखने लगा. भाभी ने मेरी आँखों में झांका, तो एकदम से शर्मा उठीं और अपने दोनों हाथों की हथेलियों से अपनी आंखों को छिपाते हुए कहने लगीं- मुझे शर्म आ रही है.
मैं उनकी कमर में हाथ डाला और उन्हें बिस्तर की तरफ ले गया. भाभी बिस्तर पर चित लेट गईं और मैंने उनकी दोनों टांगों को फैला दिया. भाभी की आंखें मुंदी हुई थीं और मैं उनकी चुत पर अपनी नाक लगा कर चुत की महक अपनी सांसों में लेने की कोशिश कर रहा था.
भाभी ने चुत एकदम साफ़ की हुई थी और चुत पर कोई सेंट लगाया हुआ था. उनकी चुत से किसी चॉकलेट फ्लेवर की महक आ रही थी.
मैंने जीभ को नुकीला किया और चुत की फांकों में ऊपर से नीचे तक फेर दिया. भाभी की एक लम्बी आह निकल गई और उन्होंने अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों से बिस्तर की चादर को भींच लिया. मैंने फिर से चुत पर जीभ को फेरा तो उनकी टांगें खुलती चली गईं. शायद भाभी को चुत चटवाने में मजा आने लगा था.
उनकी चुत से नमकीन पानी मुझे मस्त मजा दे रहा था. तीसरी बार जीभ को मैंने चुत के अन्दर डाला तो अबकी बार भाभी ने गांड उठा कर मेरा सहयोग किया.
मैंने उनकी क्लीन शेव्ड चूत को जोरदार किस किया और पूरी चुत को मस्ती से चाटने लगा. मैं भाभी की चूत में जीभ अन्दर तक डाल कर चाटने लगा, तो रेखा भाभी मेरे सर को अपनी चूत पर और ज़ोर से दबाने लगीं. उनके शरीर ने साथ छोड़ना शुरू कर दिया था और थोड़ी ही देर में ही उनकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया. चुत से पानी निकलते ही रेखा भाभी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और ज़ोरों से किस करने लगीं.
इसी बीच भाभी ने उठ कर अपने एक हाथ से मेरी पैंट और निक्कर को निकाल कर मुझे भी नंगा कर दिया. फिर वो मेरे लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगीं और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर किस करने लगीं, चूसने लगीं.
थोड़ी देर तक किस करने पर मुझे लगा कि अगर भाभी थोड़ी देर ऐसे ही मेरा लंड चूसती रहीं, तो मैं उनके मुँह में ही झड़ जाऊंगा. मैं ये नहीं चाहता था.
मैंने रेखा भाभी के मुँह से लंड बाहर निकाला और उनको किस करते हुए लेट जाने इशारा किया. भाभी लेट गईं और मैंने नीचे उनकी दोनों टांगें ऊपर उठा कर उनकी चूत पर लंड सैट कर दिया.
लंड ने भाभी की चुत की फांकों में एक बार अपना मुँह चलाया और एक ज़ोर का धक्का दे मारा. मेरा मोटा लंड रेखा भाभी की चूत को चीरता हुआ सीधा उनकी बच्चेदानी से जा टकराया. भाभी के मुँह से एक दर्द भरी आह निकलने को हुई, जो उन्होंने अपने होंठों में ही दबा ली.
मैंने भाभी की ज़बरदस्त चुदाई शुरू कर दी. मैं भाभी के मम्मों को अपने हाथों में दबाते हुए उनके चुदाई में मस्त था और भाभी भी गांड उठा उठा कर अपनी चुत में लंड ले रही थीं.
ऐसे ही भाभी की चुदाई करते हुए मैंने उनसे पूछा- पोजीशन बदलना चाहोगी?
भाभी ने हामी भरी.
तो मैंने उनको डॉगी स्टाइल में होने का बोला. वो जल्दी से डॉगी बन गईं.
फिर पीछे से मैंने उनकी चूत में लंड डाल कर चुदाई का मजा लेना शुरू किया.
करीब बीस मिनट बाद मैंने भाभी से पूछा कि माल किधर लोगी भाभी?
भाभी- अन्दर ही डाल दो.
मैंने उनकी चुत को लंड रस से भर दिया.
इस तरह पूरी रात मैंने भाभी को 4 बार चोदा. अगले दो दिन तक हम दोनों ने दिन रात जमकर चुदाई की.
इसके बाद भाभी मेरी लगभग लुगाई बन गईं. मैं हर हफ्ते दिल्ली जाता हूँ और सुबह सुबह उनको चोद कर हम दोनों साथ ही कम्पनी जाते हैं और शाम को भाभी को उनके घर छोड़ कर और चोद कर ही मैं वापस आता हूँ.

Tuesday, 19 May 2020

टीचर ने अपने स्टूडेंट्स को चुदवाया ।( heavensexstory.blogspot.com)

मेरी पड़ोसन टीचर दीदी मुझसे अपनी चूत चुदवा चुकी थी. लेकिन यह बात उनकी दो दूसरी स्टूडेंट्स को पता लग गयी. टीचर ने उन दोनों लड़कियों को मुझे कैसे चुदवाया अपने घर में!


मैंने दो बार कोमल दीदी की चुदाई की. कुछ देर बाद दीदी ने खाना बनाया और हम दोनों खाकर बेड पर लेट गए. सो गए.
मैं सो कर उठा, तो देखा कि दीदी बोलीं- ट्यूशन पढ़ने का टाइम हो गया है … तुम जल्दी से नहा लो और अपने कपड़े पहन लो. सब बच्चे कुछ देर बाद आ जाएंगे.
मैंने वैसा ही किया.
अब मैं बाहर निकल आया. दीदी सबको पढ़ाने लगी थीं.
मोनिका ने मुझे देख कर हैरानी से पूछा- अरे शिव तुम कब आए?
मैंने कहा- मैं थोड़ी देर पहले ही आया.
इससे ज्यादा मैंने कुछ नहीं कहा और रोज की तरह सबके साथ बैठ कर पढ़ने लगा.
ट्यूशन से जाने के बाद मेरा लंड बड़ा हो गया और दीदी को याद करने लगा, पर रात को क्या करता. हाथ से हिला कर सो गया.
अगली सुबह मैं स्कूल नहीं गया और दीदी के घर चला गया. उनका दरवाजा बंद था. मैंने डोरबेल बजाई, तो दीदी गेट पर आ गईं. उन्होंने गेट खोल दिया.
दीदी मुझे देख कर बोलीं- क्या हुआ शिव … आज तुम स्कूल नहीं गए?
मैंने कहा- हां दीदी आज स्कूल जाने का मन नहीं किया.
दीदी बोलीं- ओके … अन्दर आ जाओ.
मैं अन्दर आ गया तो दीदी ने मुझे गेट के पास रुक जाने के लिए बोला.
मैं रुक गया और दीदी को सवालिया नजरों से देखने लगा.
कोमल दीदी बोलीं- अन्दर मोनिका है.
मैंने कहा- दीदी, वो अन्दर क्या कर रही है?
दीदी बोलीं- उसने हम दोनों के बारे में पता लगा लिया है और वो कह रही है कि उसे भी शिव का लंड चाहिए.
मैंने पूछा- दीदी उसको कैसे पता लगा?
दीदी मुस्कुराते हुए बोलीं- वो सब छोड़ो … अब तो तुम्हें एक और नई लड़की मिल गई … उसके साथ भी मस्ती करो.
मैं बोला- दीदी, मुझे तो आपके साथ ही करनी है बस.
दीदी बोलीं- क्यों मैं कौन सा तुम्हारी वाइफ हूँ … बस मस्ती ही तो करनी है. चलो जल्दी से अन्दर आ जाओ.
ये बोलकर दीदी अपने बेडरूम में चली गईं. मैं भी उनके पीछे पीछे चल दिया.
मैंने अन्दर जाकर देखा, तो मोनिका कोमल दीदी के बेड पर कंबल ओढ़े लेटी थी.
वो मुझे देख कर बोली- आओ शिव … डरो मत … अब हम सब साथ में मस्ती करेंगे.
मैं कोमल दीदी की तरफ देखने लगा.
मोनिका बोली- दीदी, आप इसके कपड़े उतारोगी या मैं उतारूं?
इस पर कोमल दीदी कुछ नहीं बोलीं.
मोनिका ने अपना कम्बल हटा दिया और मेरी तरफ आने लगी. वो बिल्कुल नंगी थी. मोनिका पूरी 19 साल की हो गई थी. उसकी चूचियां कोमल दीदी से बड़ी थीं. हालांकि उसका वजन ज्यादा नहीं था, पर वो ज्यादा मोटी गांड की मालकिन थी.
मोनिका मेरे करीब आई और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी. उसने मेरी छाती पर हाथ रख दिया. मैंने भी उसे चूमते हुए उसकी कमर को पकड़ लिया. उसके चूचे मुझे अपने शरीर पर महसूस हो रहे थे.
लम्बे किस के बाद उसने मेरे कपड़े उतारे और बोली- दीदी पहले मैं इससे अपनी चूत चुसवा लूं … चाहो तो आप मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत भी गीली करवा लो.
मैंने मोनिका का इशारा समझ कर उसकी चूत सहलानी शुरू कर दी. वो मस्ती में बेड पर लेट गई. मैं उसकी चूत में जीभ डाल कर चाटता रहा.
कुछ देर बाद उसने कहा- शिव … अब इसमें अपना मोटा लंड अन्दर डालो. तुम्हारे आने से पहले कोमल दीदी ने एक बार मेरी चुत चूस कर पहले ही इसका पानी निकाल दिया है.
मैंने कोमल दीदी की तरफ देखा और अपना लौड़ा मोनिका की चूत में डाल दिया.
मोनिका ने कहा- आह शिव … तेरा लंड बहुत मोटा है … आह जोर से धक्का लगा न … मेरी चूत फटेगी नहीं … ये तो पहले ही खुल गई थी.
मैंने जोर से धक्का लगाया और मोनिका के ऊपर पूरा चढ़ गया. दीदी हम दोनों को देखती रहीं … मैं उसको चोदता रहा. वो मस्ती में आवाज निकाल रही थी और नीचे से अपनी गांड उठाते हुए धक्के लगा रही थी.
कुछ ही समय में मैंने अपना पानी निकाल दिया. मोनिका भी झड़ गई.
मैं उसके ऊपर से उठा, तो मोनिका बोली- आह कोमल दीदी इसके लंड से चुदवा कर तो मज़ा आ गया. आज तो काफी समय बाद चुदी हूँ … मेरी चूत में लंड का काफी पानी निकला.
कोमल दीदी ने कहा- मोनिका तुमने अपनी चुत में शिव के लंड का रस ले लिया है … यदि तुम्हें बच्चा हो गया तो क्या करोगी?
वो बोली- अरे दीदी मेरे पास जुगाड़ है.
ये कह कर मोनिका बेड से उठ कर बाथरूम में चली गई.
मैंने दीदी से कहा- दीदी मेरे पास आओ न.
दीदी बोलीं- एक मिनट में राधिका के घर फोन कर दूँ.
मैं बेड पर नंगा ही लेट गया. मोनिका बाथरूम से आ गई और उसने मुझे नंगा लेटा देखा, तो वो भी नंगी ही मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे होंठों पर किस करने लगी.
मोनिका बोली- शिव अब हम तीनों मस्ती करेंगे. आज तो मुझे मम्मी के साथ जाना है, पर उसके बाद तुम मेरे ब्वॉयफ्रेंड हो.
ये कह कर मोनिका अपने कपड़े पहन कर बाहर निकल गई और कोमल दीदी से बात करने लगी.
मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था.
फिर कोमल दीदी ने मोनिका के जाने के बाद मुझे आवाज लगाई, तो मैं कमरे से बाहर निकल आया. दीदी बाथरूम में थीं … मैं वहीं चला गया.
कोमल दीदी ने कपड़े उतार दिए थे और नहाने लगी थीं. उन्होंने मुझसे भी नहाने के लिए बोला, तो मैं अन्दर चला गया.
कोमल दीदी मुझे अपने आप नहलाने लगीं और बोलीं- शिव, मोनिका तो पूरी लंडखोर निकली … मुझे उसके बारे में ये सब पता ही नहीं था.
मैंने कहा- दीदी वो सुबह आपके घर क्यों आ गई थी?
दीदी बोलीं- मैंने सोचा आज तुम तो स्कूल जाओगे और इधर मेरी चूत में खुजली हो रही थी. तो कौन बुझाता. इसलिए मैंने मोनिका और राधिका दोनों को बोला कि सुबह घर आ जाना. मोनिका आ गई और उसने बताया कि उसे मेरी और तुम्हारी चुदाई के बारे में पता लग गया है. उसकी इस बात से मैं डर गई. फिर उसने जो भी बोला, वो मैंने किया.
मैंने कहा- दीदी कोई बात नहीं … अब मैं और आप मस्ती करेंगे.
दीदी ने मुस्कुराकर मेरे लंड पर पानी डाला और साफ करने लगीं.
कुछ देर नहाने के बाद कोमल दीदी ने कहा- शिव अब बेडरूम में चलते हैं.
मैं दीदी को अपनी गोद में नंगी ही उठा कर उनके बेडरूम में ले आया. मैंने दीदी को बेड पर गिरा दिया और उनके ऊपर लेट कर उन्हें किस करने लगा.
तभी दीदी ने कहा- शिव रुको … शायद गेट पर कोई है.
उनकी बात सुनकर मैं रुक गया.
दीदी ने कहा- मेरे कपड़े कहां हैं?
मैंने कहा- बाथरूम में हैं.
दीदी बोलीं- ओके तुम बाहर मत आना … मैं खुद मैनेज कर लूंगी. शायद मोनिका की गांड में फिर खुजली हो गई है. साली वो ही फिर से गांड मराने आ गई होगी.
दीदी कुछ देर बाद अन्दर आ गईं. उनके साथ राधिका थी. उसे देख कर मैं एकदम से डर गया.
पर कोमल दीदी ने कहा- शिव, इसको भी सब पता है … और ये हमारा साथ देने के लिए आ गई है.
मैं नंगा ही राधिका के सामने खड़ा हो गया. राधिका मेरा लंड देख कर मुस्कुराने लगी और उसने अपनी गर्दन झुका ली.
राधिका मोनिका की उम्र की ही थी, पर उसकी लम्बाई मोनिका से ज्यादा थी और कोमल दीदी से थोड़ी कम थी. उसका शरीर बिल्कुल पतला सा था.
कोमल दीदी की मेरी तरफ देखा और कहा- आज राधिका को भी अपनी चूत का मुहूर्त करवाना है.
राधिका बोली- दीदी, पहले मैं आपको चुदवाते देखूंगी, फिर सोचूंगी … अभी नहीं.
इस पर कोमल दीदी ने कहा- शिव अब सोच लो … अगर मुझे मज़ा आया तो राधिका भी तुम्हें मज़ा देगी.
मैं बोला- दीदी, मुझे भी बस आज आपको ही प्यार करना है … राधिका को फिर कभी ये सब सिखाएंगे.
दीदी बोलीं- राधिका तुम बस देखना … कुछ भी बोलना मत.
कोमल दीदी ने दोबारा अपनी मस्ती शुरू की और कपड़े उतार दिए. अब मैंने कोमल दीदी को अपने ऊपर खींच लिया और किस करने लगा.
दीदी बोलीं- पहले मेरी चूची चूसनी है शिव … होंठ नहीं.
मैंने दीदी की चूची चूसनी शुरू कर दी और दूसरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा. मैं दीदी की बाईं चूची को मुँह में डाल कर चाटता रहा.
दीदी मुँह से ‘आह आह उह उम्म..’ की आवाज़ करने लगीं. दीदी ने मेरी कमर पर हाथ लपेट दिया और अपनी टांग उठा कर मेरे ऊपर सैट कर दिया.
दीदी ने फिर बोला- शिव क्या एक ही चूची चूसनी है बस?
मैंने कहा- दीदी, आपकी चूत भी गीली कर दूँ.
दीदी ने कहा- हां करो.
मैं दीदी की चूत में जीभ डाल कर उनको मज़ा देने लगा.
कुछ देर बाद दीदी ने कहा- शिव … अब प्लीज़ अपना लौड़ा अन्दर डालो.
मैंने देखा कि मेरा लंड हिनहिना रहा था. मैं दीदी की चुत के अन्दर लंड डालने लगा.
दीदी लंड अन्दर लेते ही बोलीं- शिव आज तेज तेज धक्के लगाने है.
मैंने दीदी की नंगी चूत में पूरा लंड डाला और उनके ऊपर लेट कर जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
कोमल दीदी मस्ती में आवाज करती रहीं … कुछ देर बाद वो झड़ गईं और शांत लेट गईं. पर मेरा लंड अभी झड़ा ही नहीं था. मैं धक्के लगा कर थक गया था … तो मैं सोचा कि अभी रुक चुदाई शुरू करूंगा. ये सोचा कर मैं उनके ऊपर ही लेट गया.
कोमल दीदी बोलीं- शिव, जरा राधिका को तो देखो.
मैंने राधिका की तरफ देखा, तो वो अपनी जींस के अन्दर हाथ डालकर चुत रगड़ने में लगी थी. उसकी आंखें बंद थीं.
मैंने दीदी से कहा- दीदी, इसको भी चोदने का मन है.
दीदी बोलीं- शिव, मुझे पता है कि तुम राधिका को पसंद करते हो, इसलिए ही तो मैंने इसको बुलाया है.
दीदी ने राधिका को कहा- राधिका, शिव से अपनी चूत चुसवा लो … खुजली तो तभी मिटेगी.
राधिका ने दीदी की आवाज सुनकर एकदम से आंखें खोलीं और दीदी की तरफ देख कर शर्मा गई. वो बोली कुछ नहीं.
कोमल दीदी ने कहा- शिव तुम जाओ और उसकी हेल्प करो.
मैं दीदी के ऊपर से उठा, तो मेरा लंड दीदी की चूत में रगड़ कर बाहर निकल गया. दीदी के मुँह से ‘आह..’ निकल गई.
मैं खड़े लौड़े को पकड़ कर राधिका की तरफ गया, तो वो मेरे लंड को देखती रही मगर कुछ नहीं बोली.
मैंने राधिका के पास जाकर उसको कंधे से पकड़ कर उठाया और उसकी जींस में हाथ डाल कर उसकी चूत रगड़ने लगा. मैं उसकी पैंटी को सरका नहीं पाया.
मैं बोला- राधिका, तुम प्लीज अपनी जींस उतार दो.
राधिका ने अपनी जींस उतार दी और मुझे देख कर बोली- पैंटी भी उतार दूँ?
मैंने कहा- नहीं इसे मैं उतारूंगा.
कोमल दीदी ने कहा- शिव आज तुम पक्के मर्द बन गए हो.
मैंने राधिका की पैंटी को नीचे खींच दिया और उसको उठा कर बेड की तरफ ले जाने लगा. मेरा लंड उसकी जांघ पर रगड़ खाने लगा. उसने अपने हाथ में मेरा लंड पकड़ा और उसको उंगलियों से महसूस करने लगीं.
मैंने उसे कोमल दीदी के पास लेटा दिया. दीदी बोलीं- राधिका तुम भी शिव का लंड देख कर कंट्रोल नहीं कर सकी न … मेरा भी यही हाल हुआ था, जब मैंने इसका लंड देखा था.
मैंने दीदी से कहा- दीदी, अब आपको और करवाना है क्या?
कोमल दीदी बोलीं- नहीं शिव अब तुम राधिका की चूत का मज़ा लो … मैं बाहर चली जाती हूं.
मैंने राधिका के चूत को हाथों से छुआ और फिर चूसने लगा. वो सिसकारियां भरने लगी. शायद ये उसके साथ पहली बार हो रहा था.
कोमल दीदी ने बाहर जाते समय कहा था कि शिव इसके साथ आराम से करना … शोर मचाने की जरूरत नहीं है.
मैं राधिका की चूत चूसने लगा रहा और उस पूरा गरम कर दिया.
कुछ देर बाद राधिका चुत चौड़ी करते हुए बोली- शिव अब अन्दर डाल दो … मुझे भी कोमल दीदी के जैसे मज़ा लेना है.
मैंने अपना लौड़ा राधिका की चूत पर रखा और धक्का लगाया. उसके अन्दर लंड घुस गया. वो उठने की कोशिश करने लगी और दर्द से कराह उठी.
मैंने कहा- बस राधिका अब मज़ा आने वाला है.
वो बोली- नहीं शिव … मुझे दर्द हो रहा है … जल्दी से लंड बाहर निकालो.
मैंने लंड बाहर निकाल दिया. वो एकदम से बैठ गई और अपनी चूत पर हाथ रख कर दबाने लगी. उसको दर्द हो रहा था. मैंने उसको किस करना चाहा, पर राधिका ने मुझे अपने हाथ से रोक दिया.
वो चुत दिखाते हुए बोली- देखो, खून निकलने लगा … अब क्या होगा?
मैंने कहा- अब और मज़ा आएगा.
मैं उसको किस करने लगा. तभी दीदी आ गईं और बोलीं- क्या हुआ शिव … चूत में लंड डालो न.
मैं बोला- दीदी इसको दर्द हो रहा था.
दीदी मुस्कुरा कर बोलीं- बस एक बार ही होता है … तुम फिर से डालो.
राधिका ने कहा- नहीं दीदी … मुझे और नहीं करवाना है.
दीदी बोलीं- राधिका तुम बस दो मिनट और करो.
मैंने दीदी की तरफ देखा, तो उन्होंने आंख मारी. मैं समझ गया और मैं राधिका को लेटा कर उसके ऊपर चढ़ गया. मैंने जल्दी से अपना लौड़ा हाथ से पकड़ कर राधिका की चुत पर सैट किया.
तो कोमल दीदी बोलीं- शिव तुम इसके होंठों पर किस करो … मैं लंड डालने में मदद करती हूं.
कोमल दीदी ने मेरा लंड पकड़ कर राधिका के चूत पर रखा.
मैंने कहा- दीदी जब सैट हो जाए, तो तुम बोल देना.
मैं राधिका को किस करने लगा. दो तीन किस के बाद कोमल दीदी बोलीं- शिव अब डालो.
उनकी आवाज सुनकर मैंने धक्का लगाया और लंड अन्दर घुसा दिया. राधिका ने अपने हाथ से मुझे हटाया, पर मैं धक्के लगाता रहा.
तभी कोमल दीदी ने कहा- शिव रुकना मत.
मैं धक्के लगाता रहा और राधिका को किस करता रहा.
कुछ देर बाद राधिका को मजा आने लगा और वो झड़ने लगी. उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरे लंड पर उसका पानी लगने से मैं भी कुछ देर बाद झड़ गया.
मैं राधिका के ऊपर से उठा और पास में ही लेट गया.
दीदी ने पूछा- शिव मज़ा आया?
मैंने कहा- हां दीदी, बहुत ज्यादा.
फिर दीदी ने राधिका से पूछा- राधिका तुम्हें भी मज़ा आया होगा?
राधिका कुछ नहीं बोली और खड़ी होने लगी. तभी दीदी ने कहा भी कि राधिका थोड़ी देर लेटी रहो, पर वो नहीं मानी और खड़ी हो गई.
उसको दर्द हो रहा था, पर वो कुछ नहीं बोली.
कोमल दीदी ने उसका हाथ पकड़ा और उसको बाथरूम में ले गईं. कुछ देर बाद में भी बाथरूम में गया, तो कोमल दीदी बाहर खड़ी थीं और राधिका नहा रही थी.
मैंने दीदी को इशारा किया, वो मेरे पास आ गईं. मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ?
दीदी बोलीं- शिव, कल जब तुम मेरी चूत फाड़ कर गए थे न … मुझे पूरी रात दर्द हुआ था. सुबह मैं स्टोर से दवाई लेकर आई थी, तब राहत मिली थी. इसका तो और ज्यादा बुरा हाल है.
मैंने कहा- दीदी, अब क्या करूं?
दीदी बोलीं- कुछ मत कर … जा अन्दर घुस जा और नहा ले. अब उसको छेड़ना भी मत.
मैं बाथरूम में गया, तो राधिका अपनी चूत पर धीरे धीरे पानी डाल कर साफ़ कर रही थी.
मुझे देख कर उसने कहा- शिव मैंने बोला था कि मत करो, ये देखो क्या कर दिया.
मैंने उससे सॉरी बोला.
राधिका के बाद मैं नहा कर बाहर आया … तो राधिका दीदी से घर जाने के लिए बोल रही थी. दीदी उसको रोक रही थीं.

अकाउंट असिस्टेंट की chudai का सफर ( heavensexstory.blogspot.com

मेरे ऑफिस में नयी आई अकाउंट असिस्टेंट से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. उसने मुझसे कोई गर्लफ्रेंड बनवाने का वादा किया. जब वो ये ना कर सकी तो उसने मुझे क्या दिया?
नमस्कार दोस्तो! मेरा नाम विकास है, मैं भारत के हृदय स्थली से हूं। 26 साल का सीधा साधा नौजवान जो अपने जीवन में मस्त और एक अच्छे कार्यालय में मानव संसाधन अधिकारी (HR Officer) के पद पर कार्यरत हूँ।
मैं अन्य लेखकों की तरह बहुत बढ़ा चढ़ाकर तो नहीं लिखूंगा. हां फिर भी मैं ऊपर वाले के द्वारा बहुत ही अच्छे साइज और आकार के लण्ड का मालिक हूं जोकि साढ़े 7 इंच लंबाई का है।
मेरी सेक्स लाइफ एकदम नीरस थी।
एक दिन मेरे कार्यालय में अकाउंट असिस्टेंट की पोस्ट के लिए इंटरव्यू होने थे. कंपनी के मुख्य अकाउंट ऑफिसर को इंटरव्यू लेना था और उसके बाद की सारी प्रक्रियाओं के लिए सारे प्रतिभागियों को मेरे पास आना था।
अमूमन यह मेरे लिए हर दूसरे तीसरे दिन होने वाली सामान्य प्रक्रिया थी. किंतु प्रोफाइल अकाउंट असिस्टेंट की थी इसलिए मेरे मन में यह मुझे पहले से पता था कि इस इंटरव्यू के लिए लड़कियों की संख्या ज्यादा रहने वाली है. इसलिए मैं थोड़ा सा उत्साहित भी था।
दोपहर के खाने के समय तक लगभग सारे प्रतिभागियों के पहले राउंड के इंटरव्यू हो चुके थे. दोपहर बाद कंपनी की पॉलिसी और सैलरी की जानकारी सारे प्रतिभागियों को देना और उनको इस बारे में जो औपचारिकता थी वह मुझसे होनी थी।
मैं अपने काम में बिजी था. तभी मेरी सीट पर एक 22-23 वर्ष की साधारण सी दिखने वाली एक लड़की जो पहला राउंड क्लियर होने के बाद मेरे पास अगले राउंड के लिए आई।
वह दिखने में एकदम साधारण सी लड़की थी जैसे आम लड़कियां होती हैं. और मेरे मन में उसके बारे में किसी तरह की कोई ख्याल नहीं था।
और लड़की प्रोफाइल के लिए चुन ली गई।
क्योंकि कंपनी बहुत ज्यादा बड़ी नहीं थी और एकाउंट्स डिपार्टमेंट में इतना ज्यादा काम नहीं होता था इसलिए उस लड़की को मेरे साथ एचआर डिपार्टमेंट में भी लगा दिया गया और वह मेरे असिस्टेंट के रूप में भी काम करने लगी।
उसके साथ काम करते हुए मुझे पता लगा कि वह दूसरे शहर की रहने वाली है और मेरे शहर में वह अकेली रहती है. उसका एक बॉयफ्रेंड भी है जोकि उससे उम्र में काफी बड़ा है। साथ में काम करते हुए उसके और मेरे बीच बातचीत और जान पहचान भी बढ़ने लगी।
एक दिन यूं ही उसने मुझसे बातों बातों में पूछा कि क्या मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड है. तो जो सच था वह मैंने उसे बता दिया कि नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
उसने इस बात पर अफसोस जताया.
तो मैंने उससे कहा कि अगर तुम चाहो तो अपनी किसी फ्रेंड से मेरी जान पहचान करवा दो तो मैं भी कोई गर्लफ्रेंड बना लूंगा. क्योंकि यहां ऑफिस के काम से मुझे फुर्सत नहीं मिल पाती है। जिसके कारण मैं आज तक कोई गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया हूं.
तो उसने मुझसे वादा करते हुए कहा- 1 महीने के अंदर मैं अपनी किसी भी सहेली से आपको मिलवा दूंगी।
इस बात को 1 महीने से भी करीब ऊपर समय बीत जाने के बाद भी उसने मुझसे अपना किया वह वादा पूरा नहीं किया.
तो एक दिन मैंने उसे कहा- यार, तुमने मुझसे एक महीने का वादा किया था. परंतु इतना समय बीत जाने के बाद भी अभी तक तुमने मुझे अपनी किसी सहेली से नहीं मिलवाया है.
उसने कहा- जल्दी ही आपका काम हो जाएगा.
तो इस बार मैंने उसे लगभग डराते हुए कहा- अगर तुमने मुझे किसी लड़की से नहीं मिलाया तो मैं तुम्हारा ही नंबर लगा दूंगा।
इस बात से वह थोड़ा डर गई और उसने मुझे कहा- मैं तो आपकी मदद करना चाह रही थी. आप तो मेरे ही पीछे पड़ गए. जबकि आप जानते हो मेरा पहले से ही एक बॉयफ्रेंड है।
हालांकि मैंने उसे यह बात मजाक में कही थी क्योंकि काफी समय साथ में काम करते हुए हम दोनों एक दूसरे से काफी फ्रेंक हो चुके थे।
बाद में मैंने उस कंपनी से नौकरी छोड़ दी और अपने ही छोटे-मोटे कामों के लिए एक धंधा शुरू कर दिया।
1 दिन बरसात के मौसम में मैं अपने दोस्त के साथ उसके घर पर बैठा हुआ था. मेरे फोन पर उसी लड़की का फोन आया.
उसने मुझसे पूछा- आप कहां हो?
हम दोनों की बात हमेशा फोन पर होती रहती थी इसलिए मैंने उसे बताया- मैं अपने दोस्त के घर पर हूं.
तो उसने मुझसे कहा- क्या आप अभी मेरे घर आ सकते हो?
मुझे लगा शायद उसे कुछ जरूरी काम होगा तो मैंने उससे कहा- ठीक है, मैं आधे घंटे में पहुंचता हूं।
मैं अपने दोस्त के घर से निकला और करीब 25 मिनट में उसके घर पर पहुंचा और घर में जाकर बैठा और मैंने उससे पूछा- क्या हुआ जो अचानक से मुझे तुमने इस तरह बुलाया है?
उसने जो कहा … उसके बाद मेरे होश उड़ गए.
मुझसे उसने कहा- आपने कहा था कि अगर मैं अपनी किसी सहेली से आपको नहीं मिलवाऊँगी तो आप मेरा ही नंबर लगा दोगे. तो आज आप नंबर लगा सकते हो।
मैं 2 मिनट के लिए हक्का बक्का रह गया और समझ नहीं पाया कि क्या यह वाकई में सच है. क्योंकि मैंने वह बात उसे मजाक में कही थी. पर मुझे नहीं पता था कि असल में यह हो जाएगा।
अब अंधा क्या चाहे दो आंखें।
पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि शुरुआत कैसे की जाए।
मैंने उसे हल्के से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा और उसे अपने पास बैठा लिया।
उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथों से उसे पकड़ते हुए अपने गले से लगाया और गले से लगाने के बाद मुझे अपने सीने पर उसके नर्म नर्म मम्मे बड़े अच्छे लग रहे थे।
फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रखकर उसके होंठों से रस पीना चालू कर दिया. वाकयी में बहुत आनंददायक था और नीचे मेरी पैंट में मेरा लण्ड खड़ा होकर तूफान मचाने लगा।
वह दिखने में साधारण थी लेकिन उसने मम्मे काफी बड़े बड़े थे जिन्हें मैं हमेशा चूसने और हाथों में लेकर खेलने के सपने देखा करता था।
मैंने बिना देरी किए उसकी टीशर्ट निकाल कर उसके मम्मों को आजाद कर दिया. वह शायद पूरे तरीके से तैयार थी इसलिए उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मम्मों के आजाद होते ही मैं उन पर टूट पड़ा और उन्हें दबा दबा कर, चूस कर लाल कर दिया।
ऑफिस में साधारण सी दिखने वाली लड़की उस बंद कमरे में आज पूरी तरह से एक कयामत की तरह दिख रही थी. वह मेरी स्थिति समझ गई और उसने मेरी पैंट की बेल्ट खोलकर मेरी पैंट से मुझे आजाद कर दिया.
फिर मेरा अंडरवियर भी निकाल दिया और किसी भूखी शेरनी की तरह मेरे लण्ड पर टूट पड़ी. वो मेरा लंड अपने मुंह में लेकर बिल्कुल किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
मुझे भी सेक्स किये हुए काफी समय हो चुका था इसलिए 3 से 4 मिनट में ही मैंने अपना पूरा का पूरा माल उसके मुंह में ही छोड़ दिया। जिसे वह बिल्कुल मलाई की तरह चाट कर साफ कर चुकी थी।
अब समय आया था मुख्य काम को करने का।
मैंने उसकी कैपरी को उतार कर एक तरफ़ फेंक दिया. और मैंने देखा कि उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी. उसकी चुत एकदम चिकनी और बिना बालों वाली थी. जिस कारण मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.
और मैंने उसके दोनों पैर खोल कर अपना मुंह उसके पैरों के बीच में डालकर उसकी चुत को चाटना शुरु कर दिया.
मेरे ऐसा करने से वह बिल्कुल पागलों की तरह चिल्लाने लगी। करीब 2 मिनट बाद उसकी चुत से बेतहाशा पानी बहने लगा जिसे मैंने पूरा का पूरा चाट कर साफ कर दिया।
उसके बाद उसने मेरा सर अपनी चुत पर बहुत कस के दबा दिया और मुझसे चुत में मेरा लंड लेने के लिए पागलों की तरह सर को इधर-उधर पटक कर मेरा नाम चिल्लाने लगी.
क्योंकि हालत मेरे लण्ड की भी बहुत खराब हो चुकी थी तो मैंने उसकी चुत को चाटना छोड़कर फटाफट अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा. एक ही झटके में मैंने अपना आधा लंड उसकी चूत में डाल दिया.
मेरे अचानक हुए इस हमले से वह सकपका गई और बहुत तेजी से चिल्ला पड़ी. हालांकि वह पहले भी चुदवा चुकी थी लेकिन फिर भी मेरे साढ़े 7 इंच लंबे और ढाई इंच मोटे लंड को झेल नहीं पाई और बुरी तरह से चिल्लाने लगी.
क्योंकि उसने पहले जो 2 लण्ड लिए थे, वे मेरे सामान के मुकाबले लगभग आधे थे.
यह बात उसने बाद में खुद मुझे बताई थी.
जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाला तो धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा. हालांकि दर्द भी उसे हो रहा था. लेकिन मजा धीरे-धीरे उस दर्द के ऊपर हावी होने लगा.
उसने अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ पर नाखून लगाना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि अब यह पूरी तरीके से मजे में आ चुकी है.
उसके बाद उसने मेरी गर्दन पर मेरे कंधों पर दांत लगाना शुरू किया. दर्द से मैं भी तड़प उठा और इसका बदला मेरे लंड ने उसकी चूत का पूरी तरह से बाजा बजा कर लिया.
वह चुदवाने में बहुत मास्टर थी और बिल्कुल अंग्रेजी ब्लू फिल्मों की तरह चिल्ला चिल्ला कर मेरा उत्साह बढ़ा रही थी.
बहुत देर तक एक ही पोजीशन में चोदते रहने पर मुझे मजा नहीं आ रहा था तो मैंने उसे घोड़ी बन जाने के लिए कहा.
उसके बाद मैंने पीछे से उसकी चूत में घोड़ी बनाकर अपना पूरा लंड डाल दिया और उसके बाद मैंने उसके कूल्हों पर चपत लगाना शुरू कर दिया.
मेरे इस तरह से मारने से उसके दोनों पुट्ठे लाल हो गये क्योंकि वह एकदम दूध जैसी सफेद थी.
उसके बाद मेरी नजर उसकी गांड के छेद पर गई जो पूरी तरह से पैक नजर आ रहा था.
मैंने उससे पूछा- क्या तुमने कभी अपनी गांड को भी चुदवाया है?
तो उसने मुझे कहा- नहीं … गांड चोदवाने में मुझे कोई मजा नहीं आता. इसलिए कभी नहीं करवाया. मेरे पुराने बॉयफ्रेंड ने ट्राई किया था, एक बार मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश की थी. लेकिन दर्द की वजह से आगे नहीं कर पाए.
मैंने बहुत सारा थूक उसकी गांड के छेद पर डाला और धीरे से उसे समझ ना पड़े, ऐसा करते हुए आधा लंड उसकी गांड में डाल दिया.
अचानक हुए इस प्रहार को वह झेल नहीं पाई और घोड़ी बनी बनी ही बिस्तर पर गिर गई.
और उसने रोना शुरू कर दिया.
मैंने मामला बिगड़ता देख उसे बड़े प्यार से समझाया और उसके बाद धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी गांड के छेद में भी डाल दिया.
थोड़ी देर दर्द से वह रोती रही. परंतु बाद में उसे भी मजा आने लगा और वह फिर से उसी तरीके से चिल्ला चिल्ला के अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगी.
अब मेरा लंड कभी उसकी गांड में जाता और कभी उसकी चूत में!
बस इसी तरह उसके चुदाई करीब आधे घंटे तक चली. उसके बाद मैंने अपना पूरा पानी उसके पेट पर निकाल दिया क्योंकि उसके सेफ पीरियड नहीं था.
यह थी मेरी चुदाई की एक छोटी सी दास्तान!
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